राजा राममोहन राय (Raja Ram Mohan Roy) को भारत का जनक कहा जाता हैै राजा राम मोहन रॉय ब्रह्म समाज के संस्थापक भी थे आइये जानते हैंं - Important Information about Raja Ram Mohan Roy in Hindi - राजा राममोहन राय के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी 

राजा राममोहन राय के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी

Biography of Raja Ram Mohan Roy in Hindi - राजा राममोहन राय का जीवन परिचय

राजा राममोहन राय का जन्‍म 22 मई 1772 ई काेे बंगाल के राधा नगर नामक ग्राम में हुुआ था इनके पिता का नाम रमाकांत रॉय और माँ का नाम तारिणी देवी था राजा राममोहन राय को 15 वर्ष की आयु तक बंगाली, संस्कृत, अरबी तथा फ़ारसी का ज्ञान हो गया था राजा राममोहन राय की तीन विवाह हुऐ थे क्‍योंकि इनकी पहली दाेे पत्‍नियों की मृत्‍यु हो गई थी राजा राममोहन राय ने सन 1804-1814 ई० तक ईस्ट इंडिया कम्पनी के लिए भी काम किया था इसके बाद राजा राममोहन राय ने ये नौकरी छोडकर अपने आप को राष्‍ट्र सेवा में झोंक दिया राय जी ने देश में चल रहे अन्‍धविश्‍वास केे खिलाफ काफी अन्‍दोलन चलाये उन्‍होने बाल-विवाह ,सती प्रथा ,जातिवाद कर्म काण्ड ,पर्दा प्रथा आदि का खूब विरोध किया था उनके इन आन्‍दोलनों के लिए उनका खूब विरोध हुआ लेकिन वे लगातार अपने कार्य में लगे रहे राजा राममोहन राय जी ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की थी ब्रिटिश संसद के द्वारा भारतीय मामलों पर परामर्श लिए जाने वाले वो प्रथम भारतीय थे
राजा राममोहन राय ने 'ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन', 'संवाद कौमुदी', मिरात-उल-अखबार, बंगदूत जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया बंगदूत एक पत्र था इसमें बांग्ला, हिन्दी और फारसी भाषा का प्रयोग एक साथ किया जाता था
27 सितम्बर 1833 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल में उनका निधन हो गया उन्हें मुग़ल सम्राट की ओर से 'राजा' की उपाधि दी गयी थी

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