अभिमन्‍यु भारद्वाज 2:36:00 AM A+ A- Print Email
स्वतंत्रता दिवस हो या अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस 21 तोपों की सलामी के बारे मेें आपने सुना होगा पर क्‍या अपने कभी सोचा है कि ये सलामी 21 तोपों से ही क्‍यों दी जाती है कम या ज्‍यादा से क्‍यों नहींं अगर नहीं तो आइये जानते हैं भारत में 21 तोपों की सलामी किसे और क्‍यों दी जाती है - The History of the 21-Gun Military Salute

भारत में 21 तोपों की सलामी किसे और क्‍यों दी जाती है - The History of the 21-Gun Military Salute


दसअसल भारत के साथ साथ अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान और कैनेडा सहित दुनिया के लगभग सभी देशों में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व सरकारी दिवसों की शुरुआत पर 21 तोपों की सलामी दी जाती है
ऐसा कहा जाता है कि पहली बार 14वीं शताब्दी में तोपों को चलाने की परम्परा उस समय शुरू हुई जब कोई सेना समुद्री रास्ते से दूसरे देश जाती थी और जब वो तट पर पहुँचते थे तो तोपों को फायर करके बताते थे कि उनका उद्देश्य युद्ध करना नहीं है इसके बाद इस पद्धिति को व्‍यापारियों ने अपनाया और व्‍यापारी एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने के दौरान तोपों को चलाने का काम शुरू कर दिया था पराम्परा यह हो गई कि जब भी कोई व्यापारी किसी दूसरे देश पहुंचता या सेना किसी अन्य देश के तट पर पहुंचती तो तोपों को फायर करके यह संदेश दिया जाता था कि वह लड़ने के उद्देश्य से नहीं आए हैं इसके बाद थोडा ि‍विकास हुआ और 17वीं शताब्दी में पहली बार ब्रिटिश सेना ने तोपों को सरकारी स्तर पर चलाने का काम शुरू किया

इसके बाद 18वीं शताब्दी में अमरीका ने इसे सरकारी रूप से लागू कर दिया था. पहली बार 1842 में अमेरिका में 21 तोपों की सलामी अनिवार्य कर दी गई थी और तकरीबन 40 साल बाद इस सलामी को राष्ट्रीय सलामी को सरकारी तौर पर लागू कर दिया गया. 18वीं से 19वीं शताब्दी के शुरू होने तक अमरीका और ब्रिटेन एक दूसरे के प्रतिनिधिमंडलों को तोपों की सलामी देते रहे और इसे सरकारी तौर पर मान्यता दे दी

भारत में ब्रिटिश शासनकाल से इस परम्परा की शुरुआत हुई किसे कितनी तोपों की सलामी दी जाएगी इसका एक नियम था मसलन, ब्रिटिश सम्राट को 101 तोपों की सलामी दी जाती थी जबकि दूसरे राजाओं को 21 या 31 की. लेकिन फिर ब्रिटेन ने तय किया कि अंतर्राष्ट्रीय सलामी 21 तोपों की ही होनी चाहिए. आजादी से पहले भारत में राजाओं और जम्मू-कश्मीर जैसी रियासतों के प्रमुखों को 19 या 17 तोपों की सलामी दी जाती थी

भारत में गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है ये सलामी 21 बंदूकों से नहीं, बल्कि भारतीय सेना की 1941 में बनी 7 तोपों (जिन्हें ‘25 पाउंडर्स’ कहा जाता है) से दी जाती है. जैसे ही राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड के सीओ राष्ट्रपति को सलामी देते हैं, उसी समय ये तोपें फायर की जाती हैं. राष्ट्रगान शुरू होते ही पहली सलामी दी जाती है और ठीक 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है

21 तोपों की सलामी की अवधि राष्ट्रगान की अवधि के बराबर ही होती है अब गणतंत्र दिवस की परेड में, हर साल 21 तोपों को लगभग 2.25 सेकेंड के अंतराल पर फायर किया जाता है ताकि राष्ट्रीय गान के पूरे 52 सेकंड में प्रत्येक तीन राउंड में 7 तोपों को लगातार फायर किया जा सके प्रत्येक तोप को तीन तीन जवानों की एक एक टीम ने संभाल रखता है सटीक समय के लिए विशेष घड़ियों का उपयोग किया जाता है किसी कारणवश किसी तोप के न चल पाने की स्थिति में जरूरत के लिए अलग से तोप की व्यवस्था भी होती है गणतंत्र दिवस के अलावा तोपों का इस्तेमाल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर, 15 जनवरी को सेना दिवस पर, 30 जनवरी को शहीद दिवस पर और राष्ट्रपति भवन में दूसरे देशों के प्रमुखों के स्वागत के लिए किया जाता है

हम आपको बता दें कि जब भारत में किसी को राजकीय सम्‍मान दिया जाता है तब भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है सबसे पहली बाद भारत में पहली बार राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार की घोषणा महात्मा गांधी के लिये की गयी थी. तब तक अंतिम संस्कार के राजकीय सम्मान का प्रोटोकॉल और दिशा निर्देश नहीं बने थे. 1950 में, पहलीं बार एक निर्देश बना था और तब यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रीगण, केन्द्रीय मंत्रिमंडल के वर्तमान और भूतपूर्व सदस्यगण, के लिये ही था. फिर इस सूची में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, उपसभापति राज्यसभा भी जोड़े गए. इसके बाद राज्यो को अपने अपने राज्यों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, और मंत्रिमंडल के सदस्यों के अंतिम संस्कार को भी राजकीय सम्मान से करने की अनुमति दे दी गयी. बाद में इसमें एक प्रावधान ये भी जोड़ा गया कि उपरोक्त महानुभाओं के अतिरिक्त राज्य सरकार अपने विवेक से जिसे चाहे उसे यह सम्मान दे सकती है इस विशेषाधिकार का प्रयोग मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की सलाह से करता है और फिर इसके आदेश सम्बंधित जिला मैजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुख को भेजे जाते हैं जो इसका अनुपालन करते हैं

साथ ही राजनीति, साहित्यर, कानून, विज्ञान और कला के क्षेत्र में महत्वोपूर्ण योगदान देने वाले शख्स को राजकीय सम्मािन दिया जा सकता है. इसके अलावा देश के नागरिक सम्माान (भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण) पाने वाले व्यक्ति को भी ये सम्मान दिया जा सकता है इसके लिए केंद्र या राज्य सरकार को सिफारिश करनी पड़ती है

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