अभिमन्‍यु भारद्वाज 11:54:00 PM A+ A- Print Email
कोरोना वायरस (corona virus) से होने वाली तवाही को तो आप देख ही रहे हैं इस वायरस ने पूरी दुनियॉ में हाहाकार मचा रखा है लेकिन ये पहला मौका नहीं जब ऐसे किसी वायरस ने दुनियॉ में तहलका मचाया हो इससे पहले भी कुछ महामारीयों ने ऐसा तहलता मचाया था तो आइये जानते हैं दुनिया में तबाही मचा चुकी हैं ये महामारी - These diseases has caused havoc in the world

दुनिया में तबाही मचा चुकी हैं ये महामारी - This diseases has caused havoc in the world


दुनिया में तबाही मचा चुकी हैं ये महामारी - This diseases has caused havoc in the world

ब्लैक डेथ (Black death)

यह तबाही प्लेग के रूप में आई जिसने करोड़ों लोगों की जानें ले लीं ये बीमारी पहले चीन, मिस्र और ईरान से होते हुए पश्चिम के देशों में फैली इस बिमारी को फैलने का सही कारण पता नहीं लग पाया कुछ लोगों का मानना था कि ये बिमारी जानवरों से इंसानों में फैली और कुछ का मानना था कि ये इंसानों से इंसानों में, इस बिमारी से आदमी की 5 से 7 दिनों में मौत हो जाती थी इसमें 7.5 से 20 करोड़ लोगों की मृत्यु हो गई थी इसकी शुरूआत 1346 से 1353 में हुई इस के कारण यूरोप में कुल आबादी के 30–60% लोगों की मौत हो गई थी ब्लैक डेथ उस समय की आई हुई सबसे खतरनाक बीमारी थी जिसका इलाज उस समय नामुमकिन था

स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu)

डब्ल्यूएचओ के अनुसार सितंबर 1918 में स्पेनिश फ्लू की शुरुआत देखी गई थी, जब यूएस मिलिट्री का एक जवान इस फ्लू से पीड़ित पाया गया, जिसकी जांच पड़ताल के बाद इस वायरस की पहचान की गई सन 1918 के दौरान इस फ्लू की वजह से लगभग 7 से 10करोड लोगों ने अपनी जान गवा दी थी. लगभग 50 करोड़ लोगों को इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था. इस वायरस की वजह से लगभग 3 महीने के अंदर दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या को आघात पहुंच गया था इस वायरस की चपेट में जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, यूनाइटेड स्टेट्स और भारत आये थे

एशियन फ़्लू (Asian Flu)

एशियन फ़्लू H2N2 उपप्रकार के इन्फ्लुएंजा ए का एक महामारी प्रकोप था वर्ष 1956 से 1958 के दौरान इस जानलेवा इंफ्लूंजा ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया दुनिया की आबादी का एक-तिहाई हिस्सा इसका शिकार बना और करीब 20 से 50 लाख लोगों की जान गई इस बीमारी से 50 करोड़ लोग प्रभावित हुए और मरने वालों का आंकड़ा 10 से 20 फीसदी के बीच रहा इस बीमारी से पहले सप्ताह में ही 2.5 करोड़ लोग मारे गए.

इबोला वायरस (Ebola virus)

अफ्रीका के सूडान में रोग की पहचान सबसे पहले सन 1976 में इबोला नदी के पास स्थित एक गाँव में की गई थी इसी कारण इसका नाम इबोला पडा इबोला एक ऐसा रोग था जो मरीज के संपर्क में आने से फैलता था इबोला का नाम कागों की एक सहायक नदी इबोला के ऊपर पड़ा था और वायरस सबसे पहले अफ्रीका में पाया गया था इबोला के मरीजों की 50 से 80 फीसदी मौत रिकॉर्ड की गई थी इस रोग में रोगी की त्वचा गलने लगती थी यहाँ तक कि हाथ-पैर से लेकर पूरा शरीर गल जाता था ऐसे रोगी से दूर रह कर ही इस रोग से बचा जा सकता था

एड्स (AIDS)

एड्स जिसका पूरा नाम (Acquired immune deficiency syndrome) है एड्स HIV मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (Human immunodeficiency virus) से होता है जो कि मानव की प्राकृतिक प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है सबसे पहली बार 19वीं सदी की शुरुआत में जानवरों में मिला था. इंसानों में यह चिम्पांजी से आया था. 1959 में कांगों के एक बीमार आदमी के खून का नमूना लिया गया 1986 में पहली बार इस वायरस को एचआईवी यानी Human immunodeficiency virus वायरस का नाम मिला

जीका वायरस (ZIKA Virus)

वर्ष 1947 में कुछ वैज्ञानिक पीले बुखार का शोध कर रहे पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को जिका के जंगल में रीसस मकाक (एक प्रकार का लंगूर) को पिंजरे में रख कर अपना शोध कर रहे थे उस बंदर को बुखार हो जाता था 1952 में उसके संक्रामक घटक को जिका विषाणु नाम से बताया गया इसके 7 साल बाद 1954 में नाइजीरिया के एक व्यक्ति में यह वायरस पाया गया. इस वायरस के ज्यादा मामले पहली बार 2007 में अफ्रीका और एशिया के बाहर देखने को मिले. और अब 2018 में राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस के 22 मामले सामने आए थे

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