अभिमन्‍यु भारद्वाज 8:32:00 PM A+ A- Print Email
जहॉ पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से लड रहा है और इसका किसी के पास इसका कोई इलाज नहीं है वहीं प्‍लाज्‍मा थेरेपी इस वायरस से लडने के लिए एक उम्‍मीद की किरण दिखने लगी है और ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस थेरेपी के माध्‍यम से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को ठीक किया जा सकता है पर क्‍या आप जानते हैं कि क्‍या होती है प्‍लाज्‍मा थेरेपी अगर नहीं तो आइये जानते हैं क्‍या है प्‍लाज्‍मा थेरेपी - What is plasma therapy

क्‍या है प्‍लाज्‍मा थेरेपी - What is plasma therapy

हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कोरोना वायरस के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है सबसे पहले इस थेरेपी का इस्‍तेमाल केरल में मरीजों पर किया गया जिन पर इसका बहुत अच्‍छा असर दिखा है और इसे अन्‍य मरीजों पर किया जा रहा है ऐसा नहीं है कि इस थेरेपी का इस्‍तेमाल पहली बार किया जा रहा हो इससे पहले भी इस थेरेपी का इस्‍तेमाल किया जा चुका है स्‍वाइन फ्लू फैलने के वक्‍त भी इसका इस्‍तेमाल किया गया था और थेरेपी उस समय काफी कारगर सावित हुई थी

क्‍या होता है प्‍लाज्‍मा (What is plasma)

प्‍लाज्‍मा रक्‍त में मौजूद एक पीले कलर का तरल होता है प्लाज्मा आमतौर पर बिलीरुबिन, कैरोटीनॉयड, हीमोग्लोबिन और ट्रांसफरिन के कारण पीला होता है यह शरीर के कुल रक्त की मात्रा का लगभग 55% होता है इसमें 90 से 92 प्रतिशत भाग पानी होता है और बाकी 8 से 10% भाग में कई कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ मौजूद रहते हैं प्लाज्मा की मुख्य भूमिका पोषक तत्वों, हार्मोन और प्रोटीन को शरीर के उन हिस्सों में ले जाना है जहॉ इनकी जरूरत है पानी, नमक और एंजाइमों के साथ-साथ प्लाज्मा में भी महत्वपूर्ण घटक होते हैं इनमें एंटीबॉडी, थक्के कारक और प्रोटीन एल्ब्यूमिन और फाइब्रिनोजेन शामिल हैं कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों के अलावा प्लाज्मा में ऑक्सीजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन और अमोनिया आदि गैसें भी घुलित अवस्था में पायी जाती हैं यह लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को शरीर के माध्यम से प्रसारित करने के लिए एक माध्यम प्रदान करता है इसमें इम्युनिटी के महत्वपूर्ण घटक भी होते हैं जिन्हें एंटीबॉडी के रूप में जाना जाता है एंटीबॉडी हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाला एक प्रोटीन है यह एंटीजन नामक बाहरी हानिकारक तत्वों से लड़ने में मदद करता है जब शरीर में एंटीजन प्रवेश करते हैं तब इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज बनाते हैं एंटीबॉडीज एंटीजन के साथ जुड़कर एंटीजन को बांध देते हैं और साथ ही इनको निष्क्रिय भी कर देते हैं यहीं आपको बता दें कि एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में हजारों की संख्या में एंटीबॉडी होते हैं

क्‍या होता है प्‍लाज्‍मा थेरेपी में

प्‍लाज्मा थेरैपी के तहत ठीक हो चुके लोगों के प्लाज्मा को मरीजों से ट्रांसफ्यूजन किया जाता है इस थेरैपी में एटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है, जो किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में बनता है यह एंटीबॉडी ठीक हो चुके मरीज के शरीर से निकालकर बीमार शरीर में डाल दिया जाता है मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है प्लाज्मा दान करने की प्रक्रिया में लगभग एक घंटे लगते हैं, जैसे की रक्त दान के दौरान लगते हैं. ऐसा कहा जाता है कि प्लाज्मा के डोनर्स को एक छोटे उपकरण से जोड़ दिया जाता है, जो प्लाज्मा को निकालता है, साथ ही साथ लाल रक्त कोशिकाओं को उनके शरीर में लौटाता है इस प्रक्रिया को प्लास्मफेरेसिस कहा जाता है एक प्‍लाज्‍मा डोनर प्‍लाज्‍मा दान करने के 10 बाद फिर से प्‍लाज्‍मा दान कर सकता है कोरोना वायरस से संक्रमण से ठीक होने के 28 दिन के बाद प्‍लाज्‍मा दान किया जा सकता है

डॉक्‍टरों की मानें तो कोरोना वायरस के तीन स्टेज हैं पहली में वायरस शरीर में जाता है दूसरी में यह फेफड़ों तक पहुंचता है और तीसरे में शरीर इससे लड़ने और इसे मारने की कोशिश करता है जो सबसे खतरनाक स्टेज होती है यहां शरीर के अंग तक खराब हो जाते हैं प्लाज्मा से इलाज के लिए सबसे सही वक्त दूसरी स्टेज होती है क्योंकि पहली में इसे देने का फायदा नहीं और तीसरी में यह कारगर नहीं रहेगा डॉक्‍टरों के मुताबिक, प्लाज्मा थेरपी मरीज को तीसरी स्टेज तक जाने से रोक सकती है

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